Thursday, November 22, 2018

मधुमेह के रोगियों के लिए रामबाण इलाज

आज भारत की बहुत बड़ी आबादी मधुमेह ( madhumeh ) या शुगर ( sugar ) के चंगुल में फंसती जा रही है । 40 -45 के उम्र के बाद तो 20 प्रतिशत से ज्यादा लोग इसकी गिरफ्त में है अब तो नौजवान और बच्चे भी शुगर की बीमारी ( sugar ki bimari ) का शिकार हो रहे है।  शुगर ( sugar ) एक ऐसी अवस्था है जिसमे शरीर में इन्सुलिन की कमी हो जाती है या शरीर में इन्सुलिन तो होता है मगर वो सही तरीके से शुगर नहीं बना पाता। इससे रक्त में इन्सुलिन की कमी के कारण ग्लूकोज़ की मात्रा बढ़ जाती है।

मधुमेह निम्नलिखित कारणों से ज्यादा होता है।

1. अगर आपके परिवार में किसी को पूर्व में मधुमेह ( madhumeh ) है तो आपको या बीमारी होने की सम्भावना बढ़ जाती है।

2. मोटापा मधुमेह का बहुत बड़ा कारण है, मोटे लोग मधुमेह के जल्दी शिकार हो जाते है ।

3. शरीर में कैलोस्ट्राल की अधिक मात्रा होना या रक्त चाप के असामान्य होने से भी मधुमेह का खतरा अधिक बढ़ जाता है ।

4. अधिक शरीरिक श्रम, थकान, मानसिक थकान, तनाव, आदि के कारण भी लोग मधुमेह के शिकार हो जाते है ।

5. अधिक मीठा खाने से भी मधुमेह हो सकती है। 

6. जो लोग नियमित रूप से बाहर का खाना खाते है उन्हें मधुमेह होने की आशंका तीन गुना ज्यादा तक होती है ।

7. स्वस्थ शरीर के लिए कम से कम 4 लीटर पानी अवश्य ही पीना चाहिए । कम पानी पीने से भी मधुमेह होने की अधिक सम्भावना होती है ।

8. असमय खाने से जंक फ़ूड खाने, बासी खाने या फ्रिज में ज्यादा दिन तक रखे खाने से भी लोग मधुमेह के जल्दी शिकार हो जाते है ।

9. अपने शरीर को स्वस्थ रखने के लिए नियमित रूप से सैर करना या व्यायाम करना आवश्यक है। एक्सरसाइज ना करने से भी मधुमेह होने का खतरा बढ़ जाता है।

10. रात में देर से खाना खाने और खाने के बाद तुरंत सो जाने से भी शुगर / डायबटीज़ हो सकती है।

यौन शक्ति को बढ़ाने के लिए बेहतरीन उपाय


सेक्स और वीर्य का आपस में बहुत ही गहरा संबंध है। हर व्यक्ति चाहता है कि स्त्री के साथ संभोग करते समय वीर्यस्खलन देर से हो। इसके लिए वह हमेशा ही नई-नई चीजें ढूंढता रहता है। अपनी यौनशक्ति को बढ़ाने के लिए वह हर समय कोशिश करता रहता है इसके साथ ही वह अपनी संभोग शक्ति बढ़ाने के लिए भी प्रयत्नशील रहता है। संभोगशक्ति को बढ़ाने के लिए वीर्य को शुद्ध, गाढ़ा, और शुक्राणुओं की वृद्धि, स्तंभन शक्ति बढ़ाने के लिए आयुर्वेद के विद्वानों ने बाजीकरण नाम के अलग विभाग की रचना की है। उनके हिसाब से वीर्य को बढ़ाने के लिए, वीर्य से संबंधित दोषों को दूर करने के लिए, संभोग शक्ति और स्तंभन शक्ति बढ़ाने के लिए बाजीकरण औषधि का सेवन करना बहुत जरूरी है। बाजीकरण को वृष्य भी कहते हैं। इसलिए मनुष्य के शरीर में जिन खाद्य पदार्थों, यौगिक क्रियाओं या औषधियों के द्वारा शक्ति प्राप्त होती है उसे बाजीकरण के नाम से जाना जाता है।

चिकित्सा :

1. असगंध: 25-25 ग्राम असगंध, ब्रह्मदण्डी और निर्गुण्डी को एकसाथ मिलाकर अच्छी तरह से पीसकर और छानकर इसमें 75 ग्राम खांड मिलाकर रख लें। इसे 5-5 ग्राम की मात्रा में सुबह और शाम दूध के साथ सेवन करने से बाजीकरण के रोग में (यौन शक्ति का कम होना) लाभ मिलता है।

2. इन्द्रजौ: 50-50 ग्राम इन्द्रजौ, तारा मीरा के बीज और उटंगन के बीजों को एकसाथ कूटकर और छानकर 5-5 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम शहद में मिलाकर चाटने से बाजीकरण का रोग (यौन शक्ति का कम होना) दूर हो जाता है।

3. बिदारीकंद: 100 ग्राम बिदारीकंद को कूटकर और छानकर इसमें 100 ग्राम खांड मिलाकर 5-5 ग्राम की मात्रा में घी में डालकर सुबह-शाम सेवन करने के बाद ऊपर से खांड मिला दूध पीने से यौनशक्ति के कम होने का रोग समाप्त हो जाता है।

4. सफेद मूसली: 50 ग्राम सफेद मूसली, 100 ग्राम तालमखाना और 150 ग्राम देसी गोखरू को एकसाथ कूटकर और छानकर रख लें। फिर इसमें 300 ग्राम खांड मिलाकर 5-5 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम हल्के गुनगुने पानी से लेना बाजीकरण (यौन शक्ति का कम होना) रोग में लाभ होता है।

5. उड़द :

25 ग्राम उड़द की दाल की पिट्ठी या सिंघाढ़े के आटे को देसी घी में भूनकर लगभग 400 मिलीलीटर दूध में मिलाकर पकायें। पकने के बाद गाढ़ा होने पर कम गर्म में दूध में चीनी मिलाकर सुबह सेवन करने से बाजीकरण के रोग में आराम होता है।
उड़द की दाल का एक लड्डू रोजाना खाकर उसके बाद दूध पीने से वीर्य बढ़कर धातु पुष्ट होता है संभोग करने की शक्ति बढ़ती है।

6. काले तिल : काले तिल और गोखरू को 20-20 ग्राम की मात्रा में पीसकर 400 मिलीलीटर दूध में चीनी डालकर अच्छी तरह से पकायें। गाढ़ा होने पर गुनगुने रूप में बाजीकरण से पीड़ित रोगी को सुबह के समय खिलाने से लाभ होता हैं।

7. खजूर: 25 से 50 ग्राम खजूर या पिण्डखजूर को 100 से 250 मिलीलीटर दूध के साथ दिन में 3 बार लेने से संभोगशक्ति बढ़ जाती है।

8. भांग:

एक चौथाई से आधा ग्राम भांग के पत्तों का चूर्ण 4 से 6 ग्राम शहद और 100-250 मिलीलीटर दूध के साथ लेने से संभोगशक्ति बढ़ जाती है।
6 ग्राम भांग, 6 ग्राम अफीम, 10 ग्राम, छुहारे, 6 ग्राम पोस्तदाना, 10 ग्राम बादाम गिरी, 10 ग्राम मोठ की जड़ और 6 ग्राम धतूरे के बीजों को एकसाथ बारीक पीसकर 3 ग्राम की मात्रा में लेने से बाजीकरण रोग में लाभ मिलता है।

9. जातीफल: जातीफल का चूर्ण 1 से 3 ग्राम की मात्रा में 100 से 250 मिलीलीटर दूध के साथ वीर्य स्खलन की स्थिति में दिन में 2 बार  सेवन करने से लाभ होता है।

10. जावित्री:

1 से 3 ग्राम जावित्री के चूर्ण को 100 से 250 मिलीलीटर दूध के साथ दिन में 2 बार लेने से वीर्य का जल्दी निकलने का रोग दूर हो जाता है।
जावित्री, सफेद कनेर की छाल, समुद्रशोष, अफीम, खुरासानी अजवायन, जायफल, पीपल, मिश्री को बराबर मात्रा में लेकर बारीक पीसकर गुड़ के साथ 4-4 ग्राम की गोलियां बनाकर रख लें। इसमें से एक गोली रात को सोते समय खाने से संभोगशक्ति बढ़ जाती है।

11. नमक: 1 से 3 ग्राम नमक के चूर्ण को 100 से 250 मिलीलीटर दूध के साथ दिन में 2 बार देने से वीर्य स्खलन नहीं होता है।

12. जायफल: 3 ग्राम जायफल, 6 ग्राम रूमी मस्तगी, 6 ग्राम लौंग तथा 6 ग्राम इलायची को पीसकर शहद में मिलाकर बेर के बराबर गोलियां बना लें। यह 1 गोली रात को सोते समय खाना बाजीकरण रोग में लाभदायक होता है।

परिचय :
          वीर्य ही शरीर की सप्त धातुओं का राजा माना जाता है और ये सप्त धातुयें भोजन से प्राप्त होती हैं। इसमे सातवी धातु ही पुरुष में वीर्य बनती है। 100 बूंद खून से एक बूंद वीर्य बनता है। एक महीने में लगभग 1 लीटर खून बनता है जिससे 25 ग्राम वीर्य बनता है और गर्भाधान के लिए 60 से 70 करोड़ जीवित शुक्राणुओं का होना जरूरी होता है। इसलिए संभोग हफ्ते में एक बार ही करना चाहिए क्योंकि एक बार के संभोग के दौरान 10 ग्राम वीर्य निकल जाता है। वीर्य में जीवित शुक्राणुओं की कमी से महिलाओं को गर्भवती भी बनाया नहीं जा सकता। वीर्य परीक्षण में वीर्य गर्भाधान के लिए 7.8 पी.एच से 8.2 पी. एच ही सही माना गया है। वीर्य में दो प्रकार के शुक्राणु होते हैं एक्स और वाई। एक्स शुक्राणुओं से पुत्री पैदा होती है और वाई शुक्राणुओं से पुत्र पैदा होता है। एक शुक्राणु की लम्बाई लगभग 1/500 इंच होती है।

          कभी-कभी वीर्य पतला होने के कारण गर्भ नहीं ठहरा पाता ऐसा तब होता है जब कोई ज्यादा मैथुन करके वीर्य को नष्ट कर देता है या अन्य दूसरी किसी बीमारी से ग्रस्त होकर जैसे:- प्रमेह, सुजाक, मूत्रघात, मूत्रकृच्छ और स्वप्नदोष आदि।

चिकित्सा :

1. ब्राह्मी : ब्राह्मी, शंखपुष्पी, खरैटी, ब्रह्मदण्डी और कालीमिर्च को पीसकर खाने से वीर्य शुद्ध होता है।

2. बबूल :

बबूल की कच्ची फली को सुखाकर मिश्री में मिलाकर खाने से वीर्य की कमी व रोग दूर होते हैं। 
10 ग्राम बबूल की कोंपलों को 10 ग्राम मिश्री के साथ पीसकर पानी के साथ लेने से वीर्य-रोगों में लाभ होता है। हरी कोंपले न हों तो 30 ग्राम सूखी कोंपलों का सेवन कर सकते हैं। 
बबूल की फलियों को छाया में सुखा लें और बराबर की मात्रा मे मिश्री मिलाकर पीसकर रख लें। एक चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम नियमित रूप से जल के साथ सेवन से करने से वीर्य गाढ़ा होगा और सभी विकार दूर हो जाएंगे। 
बबूल की गोंद को घी में तलकर उसका पाक बनाकर खाने से पुरुषों का वीर्य बढ़ता है और प्रसूत काल स्त्रियों को खिलाने से उनकी शक्ति भी बढ़ती है। 
बबूल का पंचांग (जड़, तना, पत्ती, फल और फूल) लेकर पीस लें, और आधी मात्रा में मिश्री मिलाकर एक चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम नियमित सेवन करने से कुछ ही समय में लाभ मिलता है। 
बबूल की कच्ची फलियों के रस में 1 मीटर लंबे और 1 मीटर चौडे़ कपड़े को भिगोकर सुखा लेते हैं। एक बार सूख जाने पर उसे पुन: भिगोकर सुखाते है। इसी प्रकार इस प्रक्रिया को 14 बार करते हैं। इसके बाद उस कपड़े को 14 भागों में बांट लेते है, और प्रतिदिन एक टुकड़े को 250 मिलीलीटर दूध में उबालकर पीने से धातु की पुष्टि हो जाती है। 

3. शतावर :

शतावर रस या आंवला रस अथवा गोखरू काढ़ा शहद में मिलाकर पीने से वीर्य शुद्ध होता है। 
शतावर, सफेद मूसली, असगन्ध, कौंच के बीज, गोखरू और आंवला ये सभी बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें तीन-तीन ग्राम चूर्ण सुबह-शाम खाने से धातु (वीर्य) में वृद्धि होती है। 

4. गूलर :

गूलर का दूध बताशे में रख कर खाने से वीर्य शुद्ध होता है। 
पके गूलर का चूर्ण शहद या सेंधा नमक के साथ खाने से भी वीर्य शुद्ध होता है। 

5. धनिया : धनिया, पोस्त के बीज के साथ मिश्री मिलाकर खाना लाभदायक होता है।

6. छोटी दुधी : छोटी दुधी का चूर्ण मिश्री मिलाकर दूध के साथ खायें इससे वीर्य शुद्ध होता जाता है।

7. तालमखाना : तालमखाना मे मिश्री मिलाकर खाने से वीर्य शुद्ध यानी साफ हो जाता है।

8. चोबचीनी : चोबचीनी, सोठ, मोचरस, दोनों मूसली, काली मिर्च, वायविडंग और सौंफ सबको बराबर भाग में लेकर चूर्ण बनायें। बाद में 10 ग्राम की मात्रा में रोज खाकर ऊपर से मिश्री मिला दूध पी लें इससे वीर्य साफ होता है।

9. सांठी : सांठी की जड़ और काली मिर्च को पीसकर घी के साथ मिलाकर खाने से वीर्य शुद्ध होता है।

10. जायफल :

जायफल, जावित्री, माजूफल मस्तगी, नागकेसर, अकरकरा, मोचरस, वनशलोचन, अजवायन, छोटी इलायची दाना 10-10 ग्राम कूट कर छान लें। कीकर की गोंद में चने बराबर गोलियां बना छाया में सूखा लें। 1-1 गोली सुबह-शाम दूध या पानी से लें। 
जायफल 1 ग्राम रूमीमस्तगी, लौंग, छोटी इलायची दाना 2-2 ग्राम पीसकर शहद में मिलाकर चने के बराबर गोलियां बनाकर छाया में सुखा लें, संभोग (सहवास) से 2 घंटे पहले एक गोली गर्म दूध से लें। 
11. राल : राल को बारीक पीसकर 1-1 ग्राम सुबह-शाम पानी से वीर्य के रोग में सेवन करें।

12. दालचीनी :

दालचीनी 20 ग्राम पीसकर इसमें खांड़ 20 ग्राम मिलाकर 2-2 ग्राम की मात्रा मे सुबह-शाम दूध के साथ सेवन करें। 
दालचीनी और काले तिल 5-5 ग्राम पीस लें उसके बाद शहद में मिलाकर चने के बराबर गोलियां बना लें और छाया में सुखा दें। संभोग से 2 घंटे पहले एक गोली गर्म दूध से लें। 
3 ग्राम दालचीनी का चूर्ण रात में सोते समय गरम दूध के साथ खाने से वीर्य की वृद्धि होती है। 
दालचीनी को बहुत ही बारीक पीस लेते हैं। इसे 4-4 ग्राम सुबह व शाम को सोते समय दूध से फांके। इससे दूध पच जाता है और वीर्य की वृद्धि होती है। 

13. वंशलोचन : वीर्य दोष दूर करने के लिए वनंशलोचन 30 ग्राम और छोटी इलायची 3 ग्राम पीसकर 1-1 ग्राम सुबह-शाम घी व खांड़ में मिलाकर लें।

14. इमली :

300 ग्राम इमली के बीज को 500 मिलीलीटर पानी में 3 दिन तक भिगोयें। फिर इसका छिलका उतार कर छायां में सुखाकर अच्छी तरह पीसकर 10-10 ग्राम की मात्रा मे सुबह-शाम कम गर्म दूध से लें। 
इमली के बीजों के छोटे-छोटे टुकड़े कर रातभर पानी मे भिगा कर खाने से वीर्य पुष्ट होता है। 

15. लाजवन्ती : लाजवन्ती को संभोग के समय मुंह में रखने से वीर्य स्तंभन हो जाता है।

16. कीकर :

कीकर की गोंद 100 ग्राम भून लें इसे कूट कर असगंध पिसी 50 ग्राम मिलाकर रख दें। 5-5 ग्राम सुबह-शाम कम गर्म दूध से लें। 
कीकर के पत्ते छाया में सूखे 50 ग्राम कूट छानकर इसमें 100 ग्राम खांड़ मिलाकर 10-10 ग्राम सुबह-शाम दूध से लें। 

17. राई : राई, लौंग 5-5 ग्राम दालचीनी 10 ग्राम पीसकर 1-1 ग्राम सुबह-शाम दूध से लें।

18. सिम्बल : सिम्बल की जड़ 100 ग्राम कूटछान कर इसमें खांड़ 100 ग्राम मिलाकर 10-10 ग्राम सुबह-शाम गर्म दूध के साथ प्रयोग करने से वीर्य दोष दूर होते हैं।

19. असगंध नागोरी :

असगंध नागोरी, विधारा, सतावरी 50-50 ग्राम कूट छानकर रखें और 150 ग्राम खांड मिलाकर रखें। 10-10 ग्राम दूध से सुबह-शाम लें। 
नागौरी असगंध, गोखरू, शतावर तथा मिश्री मिलाकर खायें। 

20. वंशलोचन : 60 ग्राम वंशलोचन को पीसकर रखें। इसमें 40 ग्राम खांड़ मिलाकर रख लें। 5-5 ग्राम को सुबह-शाम दूध के साथ लेने से लाभ होता है।

21. फिटकरी : 30 ग्राम भुनी फिटकरी को 60 ग्राम खांड़ में मिलाकर रखें। 3-3 ग्राम सुबह-शाम पानी के साथ सेवन करें।

22. कमलगट्ठा : कमल गट्ठा या बीज पीसकर शहद में मिलाकर नाभि पर लेप करने से वीर्य स्तम्भन हो जायेगा।

23. सफेद कनेर : सफेद कनेर की जड़ 2 अंगुल की कमर में बांधने से वीर्य स्तम्भन हो जाता है।

24. सौंठ : सौंठ, बूटी हजारदाना, नकछिकनी 50-50 ग्राम कूट छान कर 5-5 ग्राम सुबह-शाम कम गर्म दूध से लें। सौंठ, सतावर, गोरखमुण्डी 10-10 ग्राम पीसकर शहद मिला कर चने कें बराबर गोलियां बनाकर छायां में सुखा लें। सुबह और शाम भोजन के बाद 1-1 गोली दूध या पानी के साथ लें। वीर्य दोष में लाभ मिलेगा।

25. असगंध :

असगंध, विधारा 25-25 ग्राम कूट छान कर इसमें 50 ग्राम खांड को मिलाकर 10 ग्राम की मात्रा मे सोने से पहले गुनगुने दूध के साथ सेवन करने से बल वीर्य बढ़ता है। 
असगंध 300 ग्राम कूट छान कर 20 ग्राम को दूध 250 मिलीलीटर में गिराकर उबालें गाढ़ा होने पर खांड़ मिला कर पी लें। 

26. बहमन : बहमल लाल 50 ग्राम पीसकर 5 ग्राम को सुबह कम गर्म दूध के साथ सेवन करने से संभोग शक्ति बढ़ती है।

27. मुनक्का : 250 मिलीलीटर दूध में 10 मुनक्का उबालें फिर दूध में एक चम्मच घी व खांड़ मिला कर सुबह पीये।

28. कालीमिर्च : कालीमिर्च के साथ गोंदी के पत्ते मिलाकर घोटकर शर्बत की तरह 21 दिन तक पीने से वीर्य पुष्ट होता है।

29. गंगेरन : गंगेरन की जड़ की छाल के चूर्ण में उसी मात्रा में मिश्री मिलाकर 10 ग्राम की मात्रा दूध के साथ 7 दिनों तक खायें वीर्य पुष्ट होता है।

30. बदुफली : बदुफली के पौधे को थोडे पानी के साथ पीसकर कपड़े में छानकर रस को निकाल लें। 100 मिलीलीटर रस में 10 ग्राम शक्कर और आधे से एक ग्राम पीपल का चूर्ण मिलाकर 7 दिनों तक सुबह-शाम पीने से वीर्य बढ़ता है।


घुटनों के दर्द (आर्थराइटिस) का इलाज

कोई भी रोग बिना किसी कारण के नहीं होता है। जब कोई मनुष्य प्रकृति के नियमों के साथ छेड़छाड़ करता है तो उसे कोई न कोई रोग हो जाता है। यदि किसी व्यक्ति के खान-पान का तरीका गलत हो, धूम्रपान और मदिरापान जैसी नशीली चीजों का सेवन करता है, अपनी जरूरत से ज्यादा काम करता है, तब उसके शरीर में कई रोग हो जाते हैं। अधिक सुख-सुविधा का जीवन जीने या अत्यधिक तैलीय पदार्थों के सेवन आदि से शरीर में वात तथा रक्त में विकृति बढ़ती ही जाती है जिसके कारण घुटने में दर्द होने लगता है। घुटने का दर्द अधिकतर उन व्यक्तियों को होता है जो अधिक मोटे तथा आलसी होते हैं। इन व्यक्तियों के शरीर का वजन बढ़ने से घुटने के पास की हड्डी के जोड़ों पर वजन अधिक बढ़ जाता है जिससे जोड़ों का रोग हो जाता है। घुटने का दर्द और भी कई कारणों से होता हैं जो इस प्रकार हैं-गलत खान-पान के तरीके के कारण शरीर के खून में खटास का बढ़ना, शरीर में क्षारत्व का कम होना, अपच होना तथा अजीर्ण रोग हो जाना आदि।

जब शरीर के किसी भाग में दर्द होता है तो इसका अर्थ यह होता है कि शरीर के उस भाग में कार्बन डाइऑक्साइड, पानी तथा अन्य जहरीले पदार्थ और वायु जमा हो गई है।

घुटनों के अंदरूनी या मध्य भाग में दर्द छोटी मोटी चोंटों या आर्थराईटीज के कारण हो सकता है| लेकिन घुटनों के पीछे का दर्द उस जगह द्रव संचय होने से होता है इसे बेकर्स सिस्ट कहते हैं| सीढ़ियों से नीचे उतरते वक्त अगर घुटनों में दर्द होता है तो इसे नी केप समस्या जाननी चाहिए | यह लक्षण कोंट्रोमलेशिया का भी हो सकता है| सुबह के वक्त उठने पर अगर आपके घुटनों में दर्द होता है तो इसे आर्थराई टीज की शुरू आत समझनी चाहिएचलने फिरने से यह दर्द धीरे-धीरे कम हो जाता है| बिना किसी चोंट या जख्म के अगर घुटनों में सूजन दिखे तो यह ओस्टियो आर्थ रा ईटीज,गाऊट अथवा जोड़ों का संक्रमण की वजह से होता है|

- उम्र बढ़ने के साथ
- हड्डियों में रक्त की आपूर्ति में रूकावट आना
- रक्त का कैंसर होना
- हड्डियों में मिनरल यानि की खनिज की कमी होना
- जोड़ों पर बहुत ज्यादा दबाव पड़ना
- जोड़ों में इंफेक्शन होना
- हड्डियों का टूटना
- मोच आना या चोट लगना
- हड्डियों में ट्यूमर आदि की शिकायत होना
- अर्थराइटिस
- बर्साइटिस
- ऑस्टियोकोंड्राइटिस
- कार्टिलेज का फटना
- कार्टिलेज का नों के दर्द्


कोई भी रोग बिना किसी कारण के नहीं होता है। जब कोई मनुष्य प्रकृति के नियमों के साथ छेड़छाड़ करता है तो उसे कोई न कोई रोग हो जाता है। यदि किसी व्यक्ति के खान-पान का तरीका गलत हो, धूम्रपान और मदिरापान जैसी नशीली चीजों का सेवन करता है, अपनी जरूरत से ज्यादा काम करता है, तब उसके शरीर में कई रोग हो जाते हैं। अधिक सुख-सुविधा का जीवन जीने या अत्यधिक तैलीय पदार्थों के सेवन आदि से शरीर में वात तथा रक्त में विकृति बढ़ती ही जाती है जिसके कारण घुटने में दर्द होने लगता है। घुटने का दर्द अधिकतर उन व्यक्तियों को होता है जो अधिक मोटे तथा आलसी होते हैं। इन व्यक्तियों के शरीर का वजन बढ़ने से घुटने के पास की हड्डी के जोड़ों पर वजन अधिक बढ़ जाता है जिससे जोड़ों का रोग हो जाता है। घुटने का दर्द और भी कई कारणों से होता हैं जो इस प्रकार हैं-गलत खान-पान के तरीके के कारण शरीर के खून में खटास का बढ़ना, शरीर में क्षारत्व का कम होना, अपच होना तथा अजीर्ण रोग हो जाना आदि।

जब शरीर के किसी भाग में दर्द होता है तो इसका अर्थ यह होता है कि शरीर के उस भाग में कार्बन डाइऑक्साइड, पानी तथा अन्य जहरीले पदार्थ और वायु जमा हो गई है।

घुटनों के अंदरूनी या मध्य भाग में दर्द छोटी मोटी चोंटों या आर्थराईटीज के कारण हो सकता है| लेकिन घुटनों के पीछे का दर्द उस जगह द्रव संचय होने से होता है इसे बेकर्स सिस्ट कहते हैं| सीढ़ियों से नीचे उतरते वक्त अगर घुटनों में दर्द होता है तो इसे नी केप समस्या जाननी चाहिए | यह लक्षण कोंट्रोमलेशिया का भी हो सकता है| सुबह के वक्त उठने पर अगर आपके घुटनों में दर्द होता है तो इसे आर्थराई टीज की शुरू आत समझनी चाहिएचलने फिरने से यह दर्द धीरे-धीरे कम हो जाता है| बिना किसी चोंट या जख्म के अगर घुटनों में सूजन दिखे तो यह ओस्टियो आर्थ रा ईटीज,गाऊट अथवा जोड़ों का संक्रमण की वजह से होता है|

- उम्र बढ़ने के साथ
- हड्डियों में रक्त की आपूर्ति में रूकावट आना
- रक्त का कैंसर होना
- हड्डियों में मिनरल यानि की खनिज की कमी होना
- जोड़ों पर बहुत ज्यादा दबाव पड़ना
- जोड़ों में इंफेक्शन होना
- हड्डियों का टूटना
- मोच आना या चोट लगना
- हड्डियों में ट्यूमर आदि की शिकायत होना
- अर्थराइटिस
- बर्साइटिस
- ऑस्टियोकोंड्राइटिस
- कार्टिलेज का फटना
- कार्टिलेज का घिस जाना।




 1 छोटा चम्मच सोंठ का पाउडर लीजिये और इसमें थोडा सरसों का तेल मिलाइए.


 इसे अच्छी तरह मिला कर गाड़ा पेस्ट बना लीजिये.


 इसे अपने घुटनों पर मलिए. इसका प्रयोग आप दिन या रात कभी भी कर सकते हैं.


 कुछ घंटों बाद इसे धो लीजिये. यह प्रयोग करने से आपको घुटनों के दर्द में बहुत जल्दी आराम मिलेगा.


घुटनों का दर्द – उपाय 3


नीचे बताई गयी सामग्री लीजिये:-


 4-5 बादाम


 5-6 साबुत काली मिर्च


 10 मुनक्का


 6-7 अखरोट


प्रयोग:


 इन सभी चीज़ों को एक साथ मिलाकर खाएं और साथ में गर्म दूध पीयें.


 कुछ दिन तक यह प्रयोग रोजाना करने से आपको घुटनों के दर्द में आराम मिलेगा.


घुटनों का दर्द – उपाय 4


खजूर विटामिन ए, बी, सी, आयरन व फोस्फोरस का एक अच्छा प्राकृतिक स्रोत है. इसलिए, खजूर घुटनों के दर्द सहित सभी प्रकार के जोड़ों के दर्द के लिए बहुत असरकारक है.


प्रयोग:


एक कप पानी में 7-8 खजूर रात भर भिगोयें.


सुबह खाली पेट ये खजूर खाएं और जिस पानी में खजूर भिगोये थे, वो पानी भी पीयें. ऐसा करने से घुटनों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं, और घुटनों के दर्द में बहुत लाभ मिलता है.


घुटनों का दर्द – उपाय 5


 नारियल भी घुटनों के दर्द के लिए बहुत अच्छी औषधी है.


 नारियल का प्रयोग:


 रोजाना सूखा नारियल खाएं.


 नारियल का दूध पीयें.


 घुटनों पर दिन में दो बार नारियल के तेल की मालिश करें.


 इससे घुटनों के दर्द में अद्भुत लाभ होता है.


आशा है आपको इन आसान घरेलू उपायों की मदद से घुटनों के दर्द से छुटकारा मिलेगा और आपकी ज़िंदगी बेहतर हो सकेगी








 1 छोटा चम्मच सोंठ का पाउडर लीजिये और इसमें थोडा सरसों का तेल मिलाइए.


 इसे अच्छी तरह मिला कर गाड़ा पेस्ट बना लीजिये.


 इसे अपने घुटनों पर मलिए. इसका प्रयोग आप दिन या रात कभी भी कर सकते हैं.


 कुछ घंटों बाद इसे धो लीजिये. यह प्रयोग करने से आपको घुटनों के दर्द में बहुत जल्दी आराम मिलेगा.


घुटनों का दर्द – उपाय 3


नीचे बताई गयी सामग्री लीजिये:-


 4-5 बादाम


 5-6 साबुत काली मिर्च


 10 मुनक्का


 6-7 अखरोट


प्रयोग:


 इन सभी चीज़ों को एक साथ मिलाकर खाएं और साथ में गर्म दूध पीयें.


 कुछ दिन तक यह प्रयोग रोजाना करने से आपको घुटनों के दर्द में आराम मिलेगा.


घुटनों का दर्द – उपाय 4


खजूर विटामिन ए, बी, सी, आयरन व फोस्फोरस का एक अच्छा प्राकृतिक स्रोत है. इसलिए, खजूर घुटनों के दर्द सहित सभी प्रकार के जोड़ों के दर्द के लिए बहुत असरकारक है.


प्रयोग:


एक कप पानी में 7-8 खजूर रात भर भिगोयें.


सुबह खाली पेट ये खजूर खाएं और जिस पानी में खजूर भिगोये थे, वो पानी भी पीयें. ऐसा करने से घुटनों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं, और घुटनों के दर्द में बहुत लाभ मिलता है.


घुटनों का दर्द – उपाय 5


 नारियल भी घुटनों के दर्द के लिए बहुत अच्छी औषधी है.


 नारियल का प्रयोग:


 रोजाना सूखा नारियल खाएं.


 नारियल का दूध पीयें.


 घुटनों पर दिन में दो बार नारियल के तेल की मालिश करें.


 इससे घुटनों के दर्द में अद्भुत लाभ होता है.


आशा है आपको इन आसान घरेलू उपायों की मदद से घुटनों के दर्द से छुटकारा मिलेगा और आपकी ज़िंदगी बेहतर हो सकेगी






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इस रोग से पीड़त रोगी को कभी भी किसी प्रकार की खटाई, अचार, छाछ, दही, टमाटर तथा पेट में वायु बनाने वाले पदार्थो को नहीं खाना चाहिए।


इस रोग से पीड़ित रोगी को दालों का सेवन नहीं करना चाहिए।


घुटने के दर्द से पीड़ित रोगी को मैदे व बेसन से बनी चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।


घुटने के दर्द से पीड़ित रोगी को तली-भुनी चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।


इस रोग से पीड़ित रोगी को ठंडे पदार्थों जैसे- कोल्डड्रिंक, आइसक्रीम, बर्फ का पानी आदि का सेवन नहीं करना चाहिए।



 ► तेल मालिश असरदार

  दर्द वाली जगह पर गहराई से की गयी तेल की मालिश भी दर्द से छुटकारा पाने में एक असरदार तरीका है। जोड़ों के दर्द का तेल, किसी अच्छे तेल से लगातार 20 मिनिट तक की गयी मालिश ऊतकों में रक्तसंचार को बढ़ा देता है और दर्द और सूजन को दूर करता है।



  ► गर्म और ठंडी सिकाई

  जोड़ों के दर्द से निजात के लिए गर्म और ठंडी सिकाई करने से भी बहुत आराम मिलता है। गर्म सिकाई करने से रक्त संचार बेहतर होता है वहीं ठंडी सिकाई से सूजन और चुभन कम होती है। 


गर्म सिकाई के लिए गर्म पानी की बोतल को तौलिया में लपेट कर गर्दन की सिकाई करें। जबकि, ठंडी सिकाई करने के लिए बर्फ के टुकड़ों को तौलिया में लपेटकर, उस तौलिया से सिकाई करें। सिकाई करते वक्त कम से कम दो से तीन मिनट तक गर्दन की लगातार सिकाई होनी चाहिए। 


यह पूरी प्रक्रिया 15 से 20 मिनट में दोहराएं। इस विधि को आराम होने तक दिन में दो बार करें। सिकाई करने के लिए इलेक्ट्रिक हीटिंग पैड का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।




नीचे बताई गयी सामग्री को मिला कर हल्दी का एक दर्द निवारक पेस्ट बना लीजिये.


 1 छोटा चम्मच हल्दी पाउडर


 1 छोटा चम्मच पीसी हुई चीनी, या बूरा या शहद


 1 चुटकी चूना (जो पान में लगा कर खाया जाता है)


 आवश्यकतानुसार पानी


इन सभी को अच्छी तरह मिला लीजिये. एक लाल रंग का गाढ़ा पेस्ट बन जाएगा.


यह पेस्ट कैसे प्रयोग करें:-


 सोने से पहले यह पेस्ट अपने घुटनों पे लगाइए. इसे सारी रात घुटनों पे लगा रहने दीजिये.


 सुबह साधारण पानी से धो लीजिये.


 कुछ दिनों तक प्रतिदिन इसका इस्तेमाल करने से सूजन, खिंचाव, चोट आदि के कारण होने वाला घुटनों का दर्द पूरी तरह ठीक हो जाएगा.

 

 



 1 छोटा चम्मच सोंठ का पाउडर लीजिये और इसमें थोडा सरसों का तेल मिलाइए.


 इसे अच्छी तरह मिला कर गाड़ा पेस्ट बना लीजिये.


 इसे अपने घुटनों पर मलिए. इसका प्रयोग आप दिन या रात कभी भी कर सकते हैं.


 कुछ घंटों बाद इसे धो लीजिये. यह प्रयोग करने से आपको घुटनों के दर्द में बहुत जल्दी आराम मिलेगा.


घुटनों का दर्द – उपाय 3


नीचे बताई गयी सामग्री लीजिये:-


 4-5 बादाम


 5-6 साबुत काली मिर्च


 10 मुनक्का


 6-7 अखरोट


प्रयोग:


 इन सभी चीज़ों को एक साथ मिलाकर खाएं और साथ में गर्म दूध पीयें.


 कुछ दिन तक यह प्रयोग रोजाना करने से आपको घुटनों के दर्द में आराम मिलेगा.


घुटनों का दर्द – उपाय 4


खजूर विटामिन ए, बी, सी, आयरन व फोस्फोरस का एक अच्छा प्राकृतिक स्रोत है. इसलिए, खजूर घुटनों के दर्द सहित सभी प्रकार के जोड़ों के दर्द के लिए बहुत असरकारक है.


प्रयोग:


एक कप पानी में 7-8 खजूर रात भर भिगोयें.


सुबह खाली पेट ये खजूर खाएं और जिस पानी में खजूर भिगोये थे, वो पानी भी पीयें. ऐसा करने से घुटनों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं, और घुटनों के दर्द में बहुत लाभ मिलता है.


घुटनों का दर्द – उपाय 5


 नारियल भी घुटनों के दर्द के लिए बहुत अच्छी औषधी है.


 नारियल का प्रयोग:


 रोजाना सूखा नारियल खाएं.


 नारियल का दूध पीयें.


 घुटनों पर दिन में दो बार नारियल के तेल की मालिश करें.


 इससे घुटनों के दर्द में अद्भुत लाभ होता है.


आशा है आपको इन आसान घरेलू उपायों की मदद से घुटनों के दर्द से छुटकारा मिलेगा और आपकी ज़िंदगी बेहतर हो सकेगी







 

 

 

 












जामुन से उपचार एवं लाभ

जामुन स्वाद में खट्टा-मीठा होने के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद है। जामुन और आम का रस बराबर मात्रा में मिलाकर पीने से मधुमेह के रोगियों को लाभ होता है। यह त्वचा का रंग बनाने वाली रंजक द्रव्य मेलानिन कोशिका को सक्रिय करता है, अतः यह रक्तहीनता तथा ल्यूकोडर्मा की उत्तम औषधि है।
गठिया के उपचार में भी जामुन बहुत उपयोगी है। इसकी छाल को खूब उबालकर बचे हुए घोल का लेप घुटनों पर लगाने से गठिया में आराम मिलता है। इसमें उत्तम किस्म का शीघ्र अवशोषित होकर रक्त निर्माण में भाग लेने वाला तांबा पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है।

ज्यादा जामुन नुकसान करता है

इतना ध्यान रहे कि अधिक मात्रा में जामुन खाने से शरीर में जकड़न एवं बुखार होने की सम्भावना भी रहती है।

इसे कभी खाली पेट नहीं खाना चाहिए और न ही इसके खाने के बाद दूध पीना चाहिए।

विषैले जंतुओं के काटने पर जामुन की पत्तियों का रस पिलाना चाहिए।

काटे गए स्थान पर इसकी ताजी पत्तियों का पुल्टिस बाँधने से घाव स्वच्छ होकर ठीक होने लगता है क्योंकि, जामुन के चिकने पत्तों में नमी सोखने की अद्भुत क्षमता होती है।

जामुन यकृत को शक्ति प्रदान करता है और मूत्राशय में आई असामान्यता को सामान्य बनाने में सहायक होता है।

जामुन का रस, शहद, आँवले या गुलाब के फूल का रस बराबर मात्रा में मिलाकर एक-दो माह तक प्रतिदिन सुबह के वक्त सेवन करने से रक्त की कमी एवं शारीरिक दुर्बलता दूर होती है।
यौन तथा स्मरण शक्ति बढ़ाए जामुन

इसके प्रतिदिन उपयोग से यौन तथा स्मरण शक्ति बढ़ जाती है।

जामुन के एक किलोग्राम ताजे फलों का रस निकालकर ढाई किलोग्राम चीनी मिलाकर शरबत जैसी चाशनी बना लें। इसे एक ढक्कनदार साफ बोतल में भरकर रख लें। जब कभी उल्टी-दस्त या हैजा जैसी बीमारी की शिकायत हो, तब दो चम्मच शरबत और एक चम्मच अमृतधारा मिलाकर पिलाने से तुरंत राहत मिल जाती है।

प्याज से उपचार एवं लाभ

कान बहता हो, उसमें दर्द या सूजन हो तो प्याज तथा अलसी के रस को पकाकर दो-दो बूंदें कई बार कान में डालने से आराम मिलता है। यदि कोई अंग आग से जल गया हो तो तुरंत प्याज कूटकर प्रभावित स्थान पर लगाना चाहिए।

विषैले कीड़े, बर्र, कनखजूरा और बिच्छू काटने पर प्याज को कुचलकर उसका लेप लगाना चाहिए। बिल्ली या कुत्ते के काटने पर रोगी को डॉक्टर के पास जाने तक प्याज और पुदीने के रस को तांबे के बर्तन पर डालकर प्रभावित स्थान पर लगाइए इससे विष उतर जाएगा।

हिस्टीरिया या मानसिक आघात से यदि रोगी बेहोश हो गया हो तो उसे होश में लाने के लिए प्याज कूटकर सुंघाएं इससे रोगी तुरंत होश में आ जाता है।

मूत्राशय की पथरी को दूर करने के लिए रोगी को प्याज के रस में शकर डालकर शर्बत बनाकर पिलाएं। ऐसा शर्बत नियमित रूप से पिलाने से पथरी कट-कटकर निकल जाती है। इस दौरान रोगी को टमाटर, साबुत मूंग तथा चावल न खाने दें। रोगी को भोजन के साथ एक खीरा खाने को दें। साथ ही रोगी को खूब पानी पीने के लिए कहें।

किसी नशे में धुत व्यक्ति को यदि एक कप प्याज का रस पिला दिया जाए तो नशे का प्रभाव काफी कम हो जाता है।

नींबू से अद्भुत उपचार एवं ‌‌लाभ

1-शुद्ध शहद में नींबू की शिकंजी पीने से मोटापा दूर होता है।

2-नींबू के सेवन से सूखा रोग दूर होता है।

3-नींबू का रस एवं शहद एक-एक तोला लेने से दमा में आराम मिलता है।

4-नींबू का छिलका पीसकर उसका लेप माथे पर लगाने से माइग्रेन ठीक होता है।

5- नींबू में पिसी काली मिर्च छिड़क कर जरा सा गर्म करके चूसने से मलेरिया ज्वर में आराम मिलता है।

6-नींबू के रस में नमक मिलाकर नहाने से त्वचा का रंग निखरता है और सौंदर्य बढ़ता है।

7- नौसादर को नींबू के रस में पीसकर लगाने से दाद ठीक होता है।

8- नींबू के बीज को पीसकर लगाने से गंजापन दूर होता है।

9-बहरापन हो तो नींबू के रस में दालचीनी का तेल मिलाकर डालें।

10-आधा कप गाजर के रस में नींबू निचोड़कर पिएं, रक्त की कमी दूर होगी।

11- दो चम्मच बादाम के तेल में नींबू की दो बूंद मिलाएं और रूई की सहायता से दिन में कई बार घाव पर लगाएं, घाव बहुत जल्द ठीक हो जाएगा।

12- प्रतिदिन नाश्ते से पहले एक चम्मच नींबू का रस और एक चम्मच ज़ैतून का तेल पीने से पत्थरी से छुटकारा मिलता है।

13- किसी जानवर के काटे या डसे हुए भाग पर रूई से नींबू का रस लगांए, लाभ होगा।

14- एक गिलास गर्म पानी में नींबू डाल कर पीने से पांचन क्रिया ठीक रहती है।

15- चक्तचाप, खांसी, क़ब्ज़ और पीड़ा में भी नींबू चमत्कारिक प्रभाव दिखाता है।

16- विशेषज्ञों का कहना है कि नींबू का रस विटामिन सी, विटामिन, बी, कैल्शियम, फ़ास्फ़ोरस, मैग्नीशियम, प्रोटीन और कार्बोहाईड्रेट से समृद्ध होता है।

17- विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मसूढ़ों से ख़ून रिसता हो तो प्रभावित जगह पर नींबू का रस लगाने से मसूढ़े स्वस्थ हो जाते हैं।

18- नींबू का रस पानी में मिलाकर ग़रारा करने से गला खुल जाता है।

19- नींबू के रस को पानी में मिलाकर पीने से त्वचा रोगों से भी बचाव होता है अतः त्वचा चमकती रहती है, कील मुंहासे भी इससे दूर होते हैं और झुर्रियों की भी रोकथाम करता है।

20- नींबू का रस रक्तचाप को संतुलित रखता है।

21-अगर बॉडी में विटामिन सी की मात्रा कम हो जाए, तो एनिमिया, जोड़ों का दर्द, दांतों की बीमारी, पायरिया, खांसी और दमा जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। नीबू में विटामिन सी की क्वॉन्टिटी बहुत ज्यादा होती है। इसलिए इन बीमारियों से दूरी बनाने में यह आपकी मदद करता है।

22- पेट खराब, पेट फूलना, कब्ज, दस्त होने पर नीबू के रस में थोड़ी सी अजवायन, जीरा, हींग, काली मिर्च और नमक मिलाकर पीने से आपको काफी राहत मिलेगी।

23- गर्मी में बुखार होने पर अगर थकान महसूस हो रही हो या पीठ और बांहों में दर्द हो, तो भी आपके पास नींबू का उपाय है। आप एक चम्मच नींबू के रस में दस बूंद तुलसी की पत्तियों का रस, चार काली मिर्च और दो पीपली का चूर्ण मिलाकर लें। इसे दो खुराक के तौर सुबह-शाम लें।

24-चेहरे पर मुंहासे होना एक आम समस्या है। इसे दूर करने के लिए नींबू रस में चंदन घिसकर लेप लगाएं। अगर दाद हो गया है, तो इसी लेप में सुहागा घिसकर लगाएं, आपको आराम मिलेगा।

25- कई बार लंबी दूरी की यात्रा करने पर शरीर में बहुत थकान महसूस होती है। ऐसे में एक गिलास पानी में दो नींबू निचोड़कर उसमें 50 ग्राम किशमिश भिगो दें। रातभर भीगने के बाद सुबह किशमिश पानी में मथ लें। यह पानी दिनभर में चार बार पिएं। इससे एनर्जी मिलेगी और बॉडी की फिटनेस भी बनी रहेगी।

26-अधिक थकान और अशांति के कारण कई बार नींद नहीं आती। अगर आप भी इस प्रॉब्लम से जूझ रहे हैं, तो लेमन रेमेडी अपनाएं। रात को सोने से पहले हाथ-पांव, माथे, कनपटी व कान के पीछे सरसों के तेल की मालिश करें। इसके बाद थोड़े से नीबू के रस में लौंग घिसकर चाट लें। ऐसा करने से आपको नींद बहुत जल्दी आएगी।

27-मोटापे से आजकल हर दूसरा शख्स परेशान होता है। इससे छुटकारा पाने के लिए आप मूली के रस में नीबू का रस व थोड़ा नमक मिलाकर नियमित रूप से लें। मोटापा दूर होगा।

28- अगर याददाश्त कमजोर हो गई है, तो गिरी, सोंठ का चूर्ण और मिश्री को पीसकर नींबू के रस में मिलाएं। फिर इसे धीरे-धीरे उंगली से चाटें।

29-सुंदर दिखना तो सभी चाहते हैं। अगर आपकी भी यही चाहत है, तो एक चम्मच बेसन, आधा चम्मच गेहूं का आटा, आधा चम्मच गुलाब जल और आधा चम्मच नींबू का रस मिलाकर लोशन तैयार करें। इसे धीरे-धीरे चेहरे पर मलें। कुछ ही दिनों में आपका चेहरा निखर जाएगा।

30- जहां तक हो सके, कागजी पीले रंग के नीबू का यूज करें। इसमें दो चुटकी सेंधा नमक या काला नमक मिला सकते हैं। यह टिप्स हमारी रीडर मीनू मोहले ने भेजे हैं।

Wednesday, November 21, 2018

सर दर्द का इलाज

1 . तेज़ पत्ती की काली चाय में निम्बू का रस निचोड़ कर पीने से सर दर्द में अत्यधिक लाभ होता है .

2 . नारियल पानी में या चावल धुले पानी में सौंठ पावडर का लेप बनाकर उसे सर पर लेप करने भी सर दर्द में आराम पहुंचेगा .

3 . सफ़ेद चन्दन पावडर को चावल धुले पानी में घिसकर उसका लेप लगाने से भी फायेदा होगा .

4 . सफ़ेद सूती का कपडा पानी में भिगोकर माथे पर रखने से भी आराम मिलता है .

5 . लहसुन पानी में पीसकर उसका लेप भी सर दर्द में आरामदायक होता है .

6 . लाल तुलसी के पत्तों को कुचल कर उसका रस दिन में माथे पर 2, 3 बार लगाने से भी दर्द में राहत देगा .

7 . चावल धुले पानी में जायेफल घिसकर उसका लेप लगाने से भी सर दर्द में आराम देगा .

8 . हरा धनिया कुचलकर उसका लेप लगाने से भी बहुत आराम मिलेगा .

9 . सफ़ेद सूती कपडे को सिरके में भिगोकर माथे पर रखने से भी दर्द में राहत मिलेगी .